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Thursday, December 21, 2023

तेरे इश्क़ में (भाग 9)


 अब तक आपने पढ़ा--------।

दुर्गा एक लोहार की बेटी है  ,लोहार रजपूती सेना के लिए युद्ध के हथियार बनाते है ,दुर्गा हथियार किले की चौकी पर लेजाती है जहां सैनिक टुकड़ी का सरदार सुमेर सिंह दुर्गा से प्रेम कर बैठता है , दुर्गा को चाहने वाला एक लोहार और है चंदू ,  एक दम बिगड़ैल निकम्मा कामचोर असंतुष्ट ।   दुर्गा के अम्मा  बाबा दुर्गा  में आया बदलाव देख  शक करने लगते हैं दुर्गा  से पूछते है पर वह नही बताती ।  सुमेर सिंह दुर्गा  से नदी किनारे बावड़ी पर मिलता है और  उसे तसल्ली देता है और आगे क्या करना है ये बताता है

सपना चंदू को बचपन से चाहती है  मगर चंदू उसे घास नही डालता , तब सपना चंदू से उसके बाबा के किये हुए बचपन के वादे की याद उसे दिलाती है मगर वह नही मानता । अब आगे ............।

चंदू पसीने में तर बतर हो चला था , हथोड़े से पीटते पीटते उस लोहे के टुकड़े को, पर लोहा आकार नही ले पा रहा था , मन ही मन अपने पुरखों को कोसता जा रहा था , क्या सौंप कर गए हैं हमारे बड़े बूढ़े हमे , विरासत में ,लोहा लंखड़ , पर काम तो करना ही था , वह बार बार सोचता था क्या हमारे लिए कोई और काम नही था , हमारी भी जमीन होती , या फिर हम कोई व्यापार करते , और भी तो बहुत काम थे ,बस एक यही काम बचा था हमारे लिए , हर समय उसके चेहरे पर असंतुष्टि के भाव रहते थे  ।

तभी सामने से उसे सपना आते दिखाई दी 

" अरे चंदू ,आज अकेले ही लगा है काम पर , सूरज आज पश्चिम से निकला है  क्या ? " सपना बोली 

" हाँ अकेले ही " चंदू बोला " क्या मलतब है तेरा ? "

" अरे गुस्सा क्यों करता है कभी काम करते नही देखा ना तुझे , इस लिए कह दिया "  ।

" अम्मा कही गई है , बाबा को  ज्वर है " , चंदू ने कहा । 

" मैं करूं कुछ मदद  ? "  सपना बोली 

" अरे हट परे  तू क्या करेगी मदद " चंदू ने तिरस्कृत भाव से कहा 

 " कर तो मैं बहुत कुछ सकती हूँ तू कहे तो " सपना ने बात करने का सूत्र पकड़ लिया ।

 " ये तेरी गले पड़ने की आदत गई नही अभी , जब देखो तब........" । 

" अरे गले पड़ रही हूं ,कोई गाला नही घोंट रही हूँ तेरा " ।और सपना बैठ कर संडासी पकड़ते बोली  "चल चला हथौड़ा " ।

" तेरे जी मे क्या है " चंदू बोला 

 " तू सब जाणे है चंदू , पर तु पता नही कहां क्या सोचता रहे " , सपना बोली 

" देख सपना  तुझे पता है ना तू जानती है हम बचपन से एक साथ खेले कूदे हैं " ।

" हाँ जानती हूं " सपना ने कहा 

" हमारे परिवारों का  भी आपस मे काफी मेल जोल है " चंदू बोला 

 " हाँ है ना " सपना ने खुश होकर कहा 

" आपस मे हम पड़ोसी भी हैं " चंदू ने फिर कहा ।

" अरे पड़ोसी के अलावा और भी बहुत कुछ हैं 

सपना ने मुश्करा कर चंदू की तरफ देखा और कहा ,   "चलो देर से ही सही  तुझे अक्ल तो आई " ।

" और हमे एक दूसरे की आदतों का  पता है  ,  फिर क्यों तंग करती  फिरती है मुझे ,ये अपनी सिर होने  की आदत छोड़ दे "  चंदू बोला ।

सपना को एक झटका लगा वह जैसे आसमान से जमीन पर गिरी हो ।

" क्यों रे क्या कमी है मुझमे , बता तो जरा " सपना बोली

"  मुझे तुझमे ऐसा कुछ नही दिखता , मेरी पसंद कहीं और है  , बात भी हो गई है " , चंदू बोला ।

" जाणू हूँ , सब जाणु हूँ , जितना वहम पालना है पाल ले अपने मन मे ,  पर कुछ होणे का नही , ये मुझसे लिखवाले , और मैं भी ना होणे दूंगी ये कभी जो तू सोचे बैठा है  , ये ध्यान से सुण ले , सपना तीखे स्वर में बोली

" इतने छोरे हैं इस गांव में , मैं ही मिला हूँ तुझे, ऐसा मुझमे क्या देखा है तूने " , चंदू बोला 

" ये तो तू अपने बाबा से पूछ ,क्या जबान दी थी तेरे बाबा ने मेरे बाबा को , जब हम छोटे थे तब  , तुझे याद नही होगा पर मुझे याद है , मेले में जब बाबा हमे घुमाने ले गए थे ,  तब तेरे बाबा ने कहा था "

" यार घासी राम  अपने चंदू और सपना की जोड़ी कितनी अच्छी लग रही है " ।

" हाँ यार मुंसी जोड़ी तो जम रही है " घासी राम ने कहा

" तो तू कहे तो आपणी छोरी को मेरे चंदू से ब्याह दियो " मुँशी बोला ।

" हाँ हाँ क्यों नही ,रही जबान " घासी राम ने जवाब दिया

" ठीक है तो पक्का मेरी तरफ से भी " मुँशी ने कहा

" और दोनो ने आपणे हाथ मिला के बात पक्की कर दी थी  " सपना ने कहा ।

" अरे वा बात तो बचपन की थी , बचपन मे जाने किसने कहाँ क्या कहा था  " चंदू बोला  ।

" पर में तो तब से ही  तुझे अपना जाणु हूँ ,  में तो तुझ से ही ब्याह  करूंगी " सपना बोली

" तेरी जबरदस्ती है क्या " चंदू बोला 

" हाँ यही समझ ले " और सपना झटके से खड़ी हो कर बोली याद रख ले मैं जमीन आसमान एक कर दूंगी और ववाल मचा दूंगी , और आंखें तरेर कर पैर पटकती बड़बड़ाते चली गई । चंदू हैरत भरी नजरों से उसे देखता रहा ,और सोच में पड़ गया ,इसको सारी बातों का पता कैसे हो गया ,और इतने विस्वास से ऐसी बात क्यों कह गई , हूँ.....शायद  रस्सी कही और भी उलझी हुई है ।


जारी है...........तेरे इश्क़ में  ( भाग  9 )


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