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Saturday, December 9, 2023

तेरे इश्क़ में (भाग 6)

 दुर्गा के बाबा अठे आओ " गोमती बोली  

" कांता बाई के गई थी , थारी छोरी  के लच्छन ठीक कोनी , किसी के धोरे जाके फंस गई हैं , जभी गुमसुम सी रहने लगी है " ।

" तूझे कैसे पता लगा इस बात का " ,  दशरथ ने हुक्का पीते नाक से धुंआ छोड़ते कहा ।

तब गोमती ने कांती बाई वाली बात उसे बताई 

" अरे उसे आने तो दे घर उसीसे पूछ लेंगे क्या बात है 

 इतनी क्यों छो खा री है तू " ,दशरथ बोला 

थोड़ी देर में दुर्गा आ गई पाणी की गागर नीचे धर दुर्गा खटोले पर बैठ गई ,अम्मा बाबा दोनो साथ बैठे थे , " काईं हो गियो बाबा दोनो कैसे चुप चाप बैठे हो " दुर्गा ने कहा  ।

गोमती ने एक पल दशरथ की तरफ देखा औऱ कहा

" लाड़ो अरी एक बात तो बता तू आजकल इतनी गुमशुम क्यों रहती है  ? तुझे हुआ क्या है " ?

" क्या कह रही है अम्मा   मुझे भला क्या होगा में तो ठीक हूँ , काम की बात कर " दुर्गा बोली ।

" छोरी मैं तेरी अम्मा हूँ ,तुझे मैंने जना है , तेरी सूरत बता रही है बात कुछ और ही है , बता कौन है वो छोरा , जिसके पीछे तेरा ये रंग बदला है ' ।

दुर्गा एकाएक सकपका गई अम्मा को कैसे पता चल गया . " रे अम्मा कौन छोरा तू तो पागल गई है,दुर्गा बोली , अंधेरे में तीर छोड़ रही है " ।

गोमती दुर्गा के पास आई और प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरती बोली " लाड़ो मैने कहा ना हमसे मत छुपा हम तेरे बैरी ना है , हम तुझे छुपके छुपके भी देख चुके हैं ,तू अपने आप मे ही हँस पड़ती है फिर मुह छुपाती है ,ये सब क्या है  बता  ? " ।

दुर्गा काफी देर तक खामोश रही  फिर उठ कर बाहर भाग गई ।

दुर्गा......। दुर्गा........। अरे सुण तो छोरी , गोमती आवज देती राह गई पर दुर्गा ने अनसुनी कर दी ।

गोमती ने कहा " दुर्गा के बाबा ,अब क्या करें ,ये तो कुछ बताती ही नही है " । 

" अरे अब ना बताती तो क्या करूँ , रहने दे ,क्यों उसे तंग कर रही है , अच्छी भली तो है , दशरथ खड़े दिमाग का आदमी था ,ज्यादा इधर उधर के पचड़े में वह नही पड़ता था " ।

" दुर्गा के बाबा , कांईं बात करो हो ,जवान छोरी है कोई ऊंच नीच हो गई तो  ? " गोमती बोली

" अरे कूछ ना होगा म्हारी छोरी ,ऐसी वैसी ना है " । दशरथ बोला और हुक्के का घूंट भरने लगा  ।

" दुर्गा के बाबा  थारे समझ मे बात काईं ना आती ,

दुर्गा की बात मैंने चंपा के छोरे से तय कर कर ली है

ऐसे में दुर्गा कही गड़बड़ ना कर दे " ।

" पर छोरी तो टाल मारे थी  , जबरदस्ती उस छोरे  के गले क्यूं बांध री है तू उसे " दशरथ बोला ।

" अरे छोरियों का क्या है जव तब टाड करती रहे है , पण माँ बाप का  तो फर्ज बणे है कि छोरी का ब्याह सही जगह और सही टैम पे हो जावे " ।

गोमती बोली

" अरे जब छोरी के मन मे ही ना है तो ,तो तू भी टाड मार वा छोरे से ब्याह की , छोरा  भी मुझे ठीक ना दीखता , चारों मेर बदनाम  लगे मुझे , म्हारी दुर्गा की उससे ना पटेगी "  दशरथ बोला ।

गोमती किसी बात को लेकर ज्यादा बहस करती तो दशरथ उसे डपट देता था , इस लिए वह ज्यादा नही बोलती थी ।

गोमती सिर पीट कर रह गई फिर चुप चाप अपने काम मे लग गई  ।

उन्हें  तभी ऐसा लगा जैसे कोई खिड़की पर हैं, और उनकी बातें सु रहा है  ।

कौन है रे 

गोमती ने बाहर आकर देखा पर वहां कोई नही था  

दुर्गा भी वहां नहीं थी  ।

तेज कदमों से भागती ,खुद को छुपती छिपाती वह गांव से बाहर एक पेड़ के नीचे बैठ कर सुस्ताने लगी और अपनी साँसों को संयत करने लगी ।

 ओह राम.......। आज पकड़ी जाती ,बाल बाल बच गई ,दुर्गा के अम्मा बाबा आज पकड़ ही लेते ,और अपने सीने पर हाथ रख कर वह आश्वस्त हो गई  ।  उसे अभी अपना काम अधूरा लगा , यूँ तो वह जानती थी कि उसके रास्ते मे कोई आने वाला नही है , उसकी चाहत कुछ अलग ही थी ,बल्कि अनोखी थी , इश्क भी क्या अजीब चीज है किस पर आ जाये कुछ पता नहीं ।

वह पूरी तसल्ली करना चाहती थी , वह चाहती थी कि उसे पूरी बात का पता लगे और उसका रास्ता साफ रहे , वह इश्क में कुछ भी कर गुजरने को तैयार थी ।  अपनी असफलता पर वह कसमसा कर राह गई ,खैर पता तो लगा कर ही रहूंगी  ।

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संध्या का समय है , अभी अंधेरे ने दस्तक नही दी थी , आसमान में हल्की लालिमा छाई थी , एक छोटी  नदी की बेलगाम मौजें पत्थरों  पर टक्करें मारती , एक अलग तरह का स्वर उतपन्न कर रही थी,दूर से कुछ पंछी उडकर अपने बसेरे की तरफ आते दिखाई पड़ रहे थे ,पास ही थोड़ी दूर पर एक सुखी पड़ी बावड़ी ,जो अब पथिक के लिए थोड़ी देर विश्राम की जगह बन गई थी ,मानो किसी का इंतजार कर रही हो । हल्की पुरवा  सांय सांय बह रही थी  ।

तभी दूर से एक घुड़ सवार  आता दिखाई पड़ता है , और बावड़ी के पास आकर रुक जाता है  ।

सुमेर सिंह कुछ देर इधर उधर देखता है ,फिर घोड़े से उतर कर इधर उधर टहलता है और फिर बावड़ी के पास पत्थर पर बैठ जाता है  ।


जारी है...............। तेरे इश्क़ में ( भाग 7)

                          भगवान सिंह रावत ( दिल्ली


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