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Saturday, December 9, 2023

तेरे इश्क़ में (भाग 5)

  







चंदू ने अपना थैला दीवार पर रख कर अपनी साँसों को संयत किया और कहा " यार दीपू ये भी कोई काम है  साला , कोयले को ढोते ढोते हमारा रंग भी कोयले जैसा काला हो गया है "।

"और क्या काम है हमारे लिए , हमारे बड़े बूढ़े यही काम दे गए है हमे विरासत में ,कि बेटा कोयला ढोवो और लोहे से लड़ते रहो बस "  दीपू ने कहा ।

 कंधे से कोयले का कट्टा उतार कर वह वहां बने चबूतरे पर बैठ गया ,और डमरू भी दोनो हाथ पीछे की तरफ कर सुस्ताने लगा ,  " क्या ही अच्छा होता हमारी भी खेती होती , आराम से किसानी करते ," डमरू बोला ।

हाँ तेरे पुरखे छोड़ गए हैँ ना तेरे लिए दस किले जमीन । दीपू तंज कसते बोला ।

" अरे यार दस दिन में एक दिन ये कोयला ढोना ही पड़ेगा , नहीं तो भट्टी कैसे जलेगी , यहाँ तक तो कोई बात नही पर यार ये लोहे के साथ कुश्ती करना मेरे बस की बात नही है " चंदू बोला  

" यार तेरा बाबा तो हट्टा कट्टा है , वही कर लेता है ये काम , पर हमें तो करना ही पड़ता है , अम्मा तो है नही मुझे ही घण चलाना पड़ता है दीपू ने कहा ।

" क्यों तुम्हारी छोटी बहन भी तो घण चला सकती है " चंदू ने बाजू में लगी कालिख साफ करते हुए कहा "अरे यार लड़कियां क्या घण चलाएगी " दीपू बोला

"क्या बात कर रहा है वो दशरथ की छोरी क्या घण पीटती है , तभी तो कितनी हृष्ट पुष्ट है , तुझे नही पता , क्या गठीली  है , तूने तो देखा था उस दिन बावड़ी के धोरे "चंदू ने कहा 

फिर दीपू ने उत्सुकता वस कहा " हाँ देखा था यार देखा था ,उसी के बारे में तो सोच रहा था ,   क्या जवानी टपक रही  है , मैं तो सोच रहा हूँ उसे ब्याह कर लाऊंगा , खूब घण बजाएगी ,सारा काम भी करेगी ,  हाय क्या मस्त  शरीर ...... " ।

" चटाक "  की आवाज हुई और दीपू की आवाज बीच मे ही बंद हो गई , उसकी आँखों के आगे अंधेरा छा गया और दिन में ही तारे चमक गए ,चंदू ने उसके गाल पर एक तमाचा जड़ दिया । " जितना कहना था कह दिया ,आगे कुछ बोलने की जुर्रत मत करना , उसके लिए मैं एक भी अपशब्द नही सुनना चाहता , वह मेरी मंगेतर बनने वाली है वैसे भी उसे मुझसे कोई नही छीन सकता समझा तू " दीपू अवाक रह गया ,डमरू भी सहम गया ।

चंदू के आगे बोलने की उनकी हिम्मत नही थी  । " कल शाम को नदी के पास जो सूखी बावड़ी है वहॉं पर मिलना कुछ खास बात करनी है मैंने ,कल बात करेंगे " । 

इतना कहकर चंदू ने कोयले का गठर उठाया और आगे चल पड़ा  वह दोनो भी रास्ते मे  बिना आवाज के चलने  लगे  ।

चंदू एक जिद्दी किस्म का अपराध पृवर्ती का युवक था , उसके चेहरे पर हमेशा असंतुष्टि के भाव नजर आते थे ,साथ ही वह अकर्मण्य औऱ निरुधमी भी था,  परंतु उसकी आकांक्षाएं असीमित थी , वह बिना कुछ करे हर बैभव को पाना चाहता था ।

अगले दिन संध्या के समय  सुखी बाबड़ी के पास तीनो आपस मे मिले ।

" तुम दोनों ध्यान से सुनो " चंदू बोला , " दुर्गा की अम्मा हमारे घर आई थी ,दुर्गा की और मेरी बात करने , उसकी अम्मा ने हामी भरी है " ।

" मैँ  दुर्गा को किसी कीमत पर नही छोड़ सकता ये तुम समझ गए होंगे , मैं तुम दोनों को इस लिये यहाँ लाया हूँ कि तुम दोनों और दस पाँच को अपनी टोली में जोड़ो  औऱ सब मिलकर सारे  लोग अपने लोहार गाँव टनक पुर में ये बात फैलाओ कि  दुर्गा और मेरी मंगनी होने वाली है , और इस बार चंदू इस गांव का सरपँच बनेगा " ।

" पर दुर्गा तो तुझसे बहुत चिढ़ती है ,बहुत खार खाती है , ऐसा करने से क्या होगा " ? डमरू बोला 

" तेरा सिर , अबे दिमाग है कि कचरे का घर है " चंदू बोला 

" इसी लिए तो ये जंजाल बना रहा हूँ , इससे लोग दुर्गा पर दबाव डालेंगे और हो सकता है सरपंच वाली बात का उस पर प्रभाव पड़ जाय " चंदू ने समझाया । " ये बात तो तूने बड़े पते की बताई ,यार तेरा दिमाग सच मे दोनो तरफ दौड़ता है । ऐसे नही तो वैसे सही " दीपू ने कहा  ।

तब चंदू ने कहा  " बस अब तुम लोग अपनी मंडली की संख्या बढ़ाओ बस ,ताकि हमारा समर्थन ज्यादा से ज्यादा लोग करें " ।

चंदू........। अरे चंदू........। चम्पा ने आवाज दी ।

" हाँ अम्मा  , काँई आवाज दे री है " ?

" अरे रोटी खा ले " चम्पा ने कहा ।

" बाबा कहां है अम्मा  ? साथ ही खाएंगे " ।

" अरे वो तो घूंट लगाके खा पीके पड़ गियो है , उसे कोई चिंता थोड़े ही है किसी बात की " ।

" वोतो मैं ही हूँ जो दिन रात चिंता में लगी रहती हूँ "

" काहे की चिंता कर री है अम्मा तू " ? चंदू बोला 

"अरे तेरे ब्याह की और किसकी , घरमे बींदणी आएगी , घर परिवार बढ़ेगा , खुसी की बात है कि नही " ?  

" अरे मैंने दुर्गा की मां से भी बात की है ,वा बोली घर मे बूझके बताएगी , पर कई दिन से कोई जवाब ना दिया वाने , कहीँ टाड तो ना कर रही है गोमती की छोरी " , चम्पा बोली  ।

" वो ना नही कर सकती अम्मा , उसके बड़े भी हाँ करेंगे ,राजी से ना तो गैरराजी से , तू देखती जा " चंदू बोला  ।

" अरे काँई करैगो रे छोरा तू , बात बिगाड़ेगा काईं  " गोमती थोड़ा सहम गई , वह चंदू की आदत जानती थी , वह गुस्सैल किस्म का था  और जिद्दी भी । चम्पा किसी अनजानी आशंका से भयभीत हो  गई ।


जारी है................। तेरे इश्क़ में ( भाग 6 )

                          भगवान सिंह रावत ( दिल्ली


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