रात का समय ,हीरा सिंह खाना खाकर अभी निबटा था ।समय का कुछ अनुमान लगाना कठिन था।उसकी पत्नी और बच्चे सो चुके थे । नींद ना आने की वजह से हीरा ने किवाड भेड दिए ,लैंप जला छोड़ थोड़ी दूर पर कल्याण सिंह के घर की ओर हुक्का पीने चला गया।खाना खाने के बाद हुक्का पीने की आदत जो थी उसे,चलो थोड़ी गपशप भी ही जाएगी।ये सोच कर वो घर से चल पड़ा।उसका घर गांव के सबसे छोर पर था, उसके घर से दूसरे घर की दूरी लगभग दो सौ मीटर थी।पहाड़ में गांव के घरों में अक्शर काफी दूरियां होती है।वह कल्याण के घर पर आकर बैठा । यहां से हीरा का घर नही दिखता था बीच मे एक खेतों का बड़ा मोड़ पड़ जाता था ।कल्याण हुक्का पी ही रहा था।"आ हीरा बैठ" खाना हो गया ? कल्याण बोला",हाँ 'हीरा ने जवाब दिया।वह दोनों खेत खलियान के विषय मे बात करने लगे । "फ़सल की कटाई कब से सुरु कर रहे हो"कल्याण बोला,"अभी हफ्ते बाद देखेगे" हीरा ने कहा ।तभी कल्याण की नजर दूर एक जगह पर टिक गई । "अरे हीरा क्या टाइम है अभी " ? कल्याण बोला , "पता नही यार, क्यों क्या हुआ " हीरा ने कहा । "अरे देख दूर उस पहाड़ी से एक उजाला इस तरफ आता दिखाई पड़ रहा है "कल्याण बोला , " अरे कोई दूसरे गांव का राह चल रहा होगा ' हीरा ने बात को हल्के में लेकर कहा । " अरे नही हीरा ये उजाला किसी राहगीर का नाही हो सकता वह तो पकडण्डी पर एक दम सीधा चल रहा है ।गाड़ी के जैसा " अपनी बात पर जोर देते कल्याण बोला । तब हीरा ने गौर से देखा । " हाँ यार वह कोई आदमी तो नही लगता " । हीरा ने उस का समर्थन करते कहा "फिरतो वही है तुझे ढोल नगाड़े की आवाज आ रही है क्या " ? कल्याण बोला सुन ध्यानसे
हीरा कान लगा कर सुनने लगा । " अरे आ रही है हल्की सी ,पक्का आछरी ही है " 'हीरा ने झट खड़े होते हुए कहा ।इस बीच वह रोशनी नजदीक आ गई थी । तभी हीरा सिंह को अपने घर का ख्याल आया ।ओह.... वह तो किवाड भेड कर आ गया था बस ।उसकी पत्नी और बच्चे तो सो रहे होंगे । में तो लैंप जला छोड कर आया था । हे भगवान अब क्या होगा ।क्या मैं तब तक वहां पहुंच पाऊंगा ? उस उजाले से पहले ? इस बीच रोशनी काफी तीव्र गति से बढ़ती चली आ रही थी।हीरा ने तेजी से अपने कदम घर की ओर बढ़ाये ।रोशनी उसके घर के लगभग पास आ चुकी थी ।रास्ता ही वही था ।लगभग दौड़ता सा वह हांफने लगा ,आज तो गए कामसे, वह डर के मारे कांपने लगा था।पर उसने हिम्मत नही हारी ।नंगे पैर भागते हुए उसके पैर भी जगह जगह से छिल गए ।अब वह अपने घर के चौक के पास आगया था।और रोशनी उससे लगभग बीस बाइस मीटर दूर थी ।वह लगभग हवा की तरह घर की सिढिया लांघता जोर से दरवाजे को धक्का दे कर अंदर पहुंचा।और झट एक हाथ से लैंप की बत्ती को मसल डाला उसका हाथ भी झुलस गया । डर के मारे अभी भी उसकी धड़कने तेजी से चल रही थी । रोशनी चौक के अंदर आ चुकी थी। हीरा ने देखा वह एक नही दो थी । दरवाजे के पास आकर उन दोनों की आवाज साफ सुनाई पड़ रही थी । हीरा का डर के मारे दिल बैठा जा रहा था ।आज तो बच्चे और मैं सब गए।आज बचना मुश्किल हैं।तभी उसे आवाज सुनाई पड़ी ।"दीदी चलो न अंदर"उनमे से एक नए कहा ।
"अरे चल छोड़ आज रहने दे " दुसरी बोली ," नही दीदी चल ना मुझे अंदर जाना है"। पहले वाली आवाज़ आईं " रहने दे ना " दूसरी बोली "नहीं चल अब आही गए हैं तो चल" पहली वाली की आवाज आई ,ये वार्ता लाप सुन हीरा का कलेजा काँप उठा ,डर के आगे हिम्मत दम तोड़ चुकी थींऔर तब बेहोशी ने उसे अपने आगोश में ले लिया। सुबह जब उसने अपने मुह पर पानी के छींटे महसूस किए तो वह झट से उठ बैठा , उसे रात का सारा माजरा समझ आ गया । "क्या हो गया था तुम्हे " , उसकी पत्नी ने पूछा ,उसकी पत्नी जाकर एक पडोशी को भी बुला लाई थी । बच्चे भी गुमशुम बैठे उसे ताक रहे थे । वह जिंदा है और सब ठीक है,तब जाकर उसकी सांस में सांस आई ।वह कुछ ना बोला उन्हें रात की बात बताना उसने ठीक नही समझा । कहीं ये लोग डर ना जाये । "अरे कुछ नही शायद चक्कर आ गया था,।कुछ नही में ठीक हूँ। मुझे कुछ नही हुआ है " । वह उठा और मुह हाथ धो कर धूप,दिया जलाने लगा और कुल देवता के साथ आछरी की भी पूजा अर्चना की ।तब जा कर उसका मन शांत हुआ ।उसके पश्चात उसने कभी वह गलती नही की जो कल उससे अकस्मात हो गई थी ।
भगवान सिंह रावत (स्वरचित)

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