सभी रचनाकारों को और पाठक बंधुओं को मेरा प्रणाम !
मेरी इस रचना को पढ़ने से पहले आपको आज से लगभग पचास साल पीछे जाना होगा ।उस समय का व्यक्ति किस धारणा में जीता होगा , उस समय संचार ,परिवहन,उच्चस्तरीय शिक्षा,के माध्यमों का बहुत आभाव था, साथ ही समाज मे पुरानी परम्पराओं की पकड़ थी । आज स्थिति काफी बदल चुकी है। हमने पीछे क्या छोड़ा है,नई पीढ़ियाँ के इस पूरानी परम्पराओं के प्रति नए विचार क्या हैं पौरणिक परंपराएं और नए विचार जब किसी मोड पर टकराते हैं तो क्या स्थिति उत्पन्न होती है , इस कहानी में इसी तरह का चित्रण है ।
सूरत सिंह ने , देखा दोपहर होने को थी ।उसने जल्दी जल्दी बैलों को हांकना चाहा, मगर खेत अभी बाकी था।धूप भी शिर पर चढ आई थी । किसी तरह उसने पूरा खेत जोत डाला।
और हल और जुआ (हल चलाते समय बेलो के कंधे पर रखा जाता है) कन्धे पर उठा, बैलों को घर की तरफ हड़का कर खेत से चल पड़ा ।
"कमला की माँ ' अरे जरा बैलों को बांध"और हल जुआ एक तरफ पटक कर चारपाई पर बैठ सुस्ताने लगा । " पूरा खेत कर आये " बेलों को पानी पिलाते हुए सुमना बोली। 'हाँ हो गया' पूरा दिन खत्म हो जाता है इस खेत पर "।
"अरे कमला अभी तक नही आई स्कूल से"खाना खाते हुए सूरत सिंह बोला ।"आ जायेगी ...चार बजे तक आती है ना" शुमना लोटे में पानी र्देते बोली ।
सुबह सात बजे जब सूरत बैलो का न्यार पानी दे रहा था, तो उसे ढोल नगाड़े की आवाज आई,तो सूरत रसोई में काम करती शुमना से बोला "अरे शुमना आज क्या है भई, गाँव मे,ढोल की आवाज आ रही है" पाइप से चूल्हा फूंकती शुमना बोली " आज संग्रान्द (संक्रांति) है ना इस लिए" । "लो इनको भी जब देखो मांगने का मौका मिल जाता है ।इन औजियों की भी मौज है" ( औजी -गांव में जो लोग छोटी जात के होते है,वह लोग ढोल बजाना,बॉल काटना ,कपड़े सिलना, और छोटे मोटे और भी कई तरह के काम करते हैं,जिसके बदले उन्हें समय समय पर ठाकुरों के घरों से अनाज और खाना पीना मिल जाता है) "अरे कमली को उठाओ स्कूल नही जाना क्या उसे"
"बाबा में कबसे उठी हूं आज छुट्टी है ,आज नही जाना स्कूल"
नौ साल की कमली चौक में उछलती बोली ।"अच्छा चलो ये ठीक है,खेत चलोगी मेरे साथ " ? सूरत बोला
"हाँ बाबा चलूंगी"खुश होती कमली बोली ।
तभी ढोल की आवाज नजदीक सुनाई पड़ी ,और उनके चौक पर एक ढोल वाला,एक नागाड़े वाला और एक औरत जिसके सिर पर एक टोकरा रखा था, जिसमे माँगा हुआ कुछ अनाज था । उनमे एक मंगलू दास ढोल की आवाज कम करता हाथ जोड़ कर प्रणाम करते बोला "जय हो ठाकुर महाराज की" सूरत बोला "कैसा है रे मंगलू " ?
" ठीक हूँ साब कृपा है आप लोगों की "
तभी शुमना एक सूप में भरकर अनाज ले कर आई और उनके साथ वाली औरत को इशारा करती बोली "ये ले, टोकरी पहले नीचे रख "और उससे एक निश्चित दूरी बनाते हुए उसकी टोकरी में अनाज उंडेल दीया । उस औरत ने आभार प्रकट किया ।और वो दूसरे घरों की तरफ चलने लगे । कमली ये सब देख रही थी । फिर कुछ देर बाद सूरत सिंह बैलों को हड़काता खेत पर चल पड़ा ।साथमे कमली भी थी । सूरत सिंह कुछ देर हल चला कर सुस्ताने बैठा,और बीड़ी पीने लगा । तब कमली बोली "बाबा जी ये जो औजी हैं, ये लोग कौन होते हैं," "कयूं क्या हुआ सूरत ने पूछा " । "मैंने देखा है लोग उनसे दूर रहते है,मां जी ने भी उनकी कितनी दूर से अनाज ढिया ","उनको छूने से क्या होता है "। "हमारे स्कूल में भी दो औजियों के बच्चे पढ़ने जाते हैं उनसे भी सब दूर हटकर चलते है" ,कमली अपने सरल स्वभाव से बोली ।
तब सूरत थोड़ा कड़क स्वभाव से बोला "हां बेटा हम लोग श्रवण है ,और वे लोग छोटी जात के हैं हम लोगों को उनसे दूरी बनाकर रखनी पड़ती है,वो हमारे किसी भी बर्तन या किसी चीज को छू ले तो वो चीज अछूत हो जाती है,उसे फर धो कर साफ करना पड़ता है ,और वो हमारे घर में दहलीज से बाहर ही रहते है "। "ऐसा क्यों है बाबा"
"अरे बस है तो है ,पहले से ये सब चलता आ रहा है हमारे बाप दादा ये करते आये है तुम अभी बच्चे हो ,कुछ जानते नही हो , तू बहस बहुत करती है "। कमली के कोमल स्वभाव को सूरत ने क्रूरता के आवरण से ढक दिया,कमली सहम कर चुप हो गई ।और कूछ न बोली ।
"बेटा कमली देख तो ये क्या है " ? क्या हैं मां ?शुमना के हाथ मे नई फ्रॉक देख कर कमली खुश होते बोली"ये कब लाये बाबा ....बाजार तो गए नही कितने दिन से " ?
"अरे ये बाजार से नही लाये ,मंगलू औजी है ना उसने सिली है,पहन तो जरा " । कमली ने आसमानी रंग की फ्राक पहनी, उसे बहुत पसंद आई । तभी कमली भ्रांतिचित हो कर बोली," माजी बाबा तो कह रहे थे कि इनसे दूरी रखनी पड़ती है,ये हमारी चीज को हाथ नही लगाते ।चीज अछूत हो जाती है ,फिर ये......।
"अरे वो सब ठीक है ये तो कपड़ा है ,इसमें ऐसा नही होता। ले इसे पहन कर जा स्कूल । औऱ हाँ तू बहस बहुत करती है,तुझे जैसे बोलें वैसा करा कर " शुमना बोली । बाबा और माँ से औजियों के लिए एक सी प्रतिक्रिया देख असमंजस सी हो कर कमली फ्रॉक पहन स्कूल चली गई ।
गाँव मे दीवाली की चहल पहल, आते जाते दिखते लोग,दुकान पर लोगों की भीड़ बता रही थी कि लोग आज कितने प्रसन्न हैं । "चलो बाबा बहुत देर हो गई । दुकान में पटाखे नही बचेंगे बाद में "। " अरे चलो गुड़िया रानी चलो " सूरत बोला ।औऱ दोनो घर से निकल पड़े । दुकान पर भीड़ काफी थी , सूरत बाहर बेंच पर बैठ गया । एक और आदमी जीतू वहां पहले ही बैठा था ,"और जीतू कैसा है रे तू" ? सूरत बोला "बस चाचा सब ठीक है ' ।
जीतू ने उत्तर दिया ।"दीवाली कैसे मन रहे हो अबकी बार"सूरत बोला "बस चाचा एक रिश्तेदार आया है घर पर शाम को बैठेंगे,दीवाली मानेगी"जीतू बोला "बहुत खूबअरे मिल तो जाएगी पीने कोआज यहां" सूरत ने आहिस्ते से कहा ।"अरे चाचा मिलेगी क्यों नही ,मंगलू जिंदाबाद"जीतू बोला । "अच्छा अब मंगलू भी कच्ची तोड़ने लगा है"सूरत बोला ।
"हाँ काफी दिन हो गए "।"ये रहा उसका छोरा बुला लूँ मंगलू को '
"हाँ बुला यार आज तो चाहिए ही"
एक गंदी सी कमीज पहने एक लड़का पंद्रह साल का कुछ बच्चों में खेल रहा था । "अरे कालू ओ कालू इधर आ " ।
"जा जरा अपने बाप को बुला कर ले आ ,कहना सुरतु चाचा ने बुलाया है ' । कालू सरपट भागता चला गया । थोड़ी देर बाद मंगलू आया "जय हो ठाकुरों और हाथ जोड़ कर बोला "महाराज हुकम ' तब सुरतु बोला "अरे हुकम क्या एक बोतल चाहिए ,जुगाड़ कर"
"👌साब मिल तो जाएगी पर नगद होगी ,त्योहार का दिन है ना "
"हाँ ठीक है मिल जाएगी" ,मंगलू बोला । "ये ले " सुरतु ने बगल के खीसे से एक नोट लिकाल कर मंगलू को थमाया । मंगलू रुपये को माथे से लगा बोला ।
"थोड़ी देर रुको ठाकुरो लाता हूँ "। कमली एक ओर बैठी चुप चाप सब देख रही थी बाबा क्या।मंगा रहे हैं उस औजी से,औऱ बाबा ने ये क्या किया ,मंगलु को हात में रुपया पकड़ाया । उसके मन मे फिर अन्तर्ध्वन्ध चलने लगा ,तभी वहां से उसका ध्यान हटा , वह जमीन पर कंचे खेलते बच्चों को देखने में मस्त हो गई । तभी उसे बाबा की आवाज आई "कमली आजा ले ले अपनी पसंद के पटाखे "।कमली ने कुछ फुलझड़ियां कुछ चकरियाँ और कुछ पटाखे खरीदे,,सुरतु ने कुछ और घर का सामान खरीदा ,दुकान से बाहर आये तो सामने मंगलु खड़ा था सुरतु ने इधर उधर देखा और झट मंगलु के हाथ से कागज में लिपटी बोतल लेकर कुरते के अंदर कर पाजामे में खोंस दी ।और बोला " कमली चल बेटा चल घर चल बहुत देर हो गई " ।
कमली देख चुकी थी ।ये क्या हो सकता है ।जो बाबा ने कमीज में छिपाया है , घर पहुंचकर कमली ने चुपके से देखा बाबा ने दूसरे कमरे में जाकर वह सामान निकाला ,और कागज हटाया ,फिर उसे गौर से देखा और प्रसन्नचित होकर अलमारी में रख दी । ओह..... तो ये दारू की बोतल है , कमली समझ गई थी । कमली सोच में पड़ गई , उसका मन फिर ऊहापोह के जंजाल में फंस गया । ये क्या माँ तो इनसे दूर रहने को कहती है , और बाबा बोतल हाथ से ले रहे हैं । कमली असमंजस में पड़ गई । वह कुछ निर्णय नही ले सकी ।और इधर उधर के काम मे व्यस्त हो गई ।
शाम को छः बजे चुके हैं दीवाली की तैयारियां जोरों पर थी,रह रह कर पटाखों की आवाज सुनाई पड़ रही थी । सुमना पकवान बना चुकी तो उसने कमली को आवाज दी ।
"कमली.... ओ कमली .....। इधर आ बेटा बाबा को ये पकवान दे आ ,पूजा कर लेंगे और लक्ष्मी माता को भोग लगाएंगे "। कमली ने प्लेट में पकवान बाबा को दिए ।और दोनों घरमे बने मँदिर में पूजा करने बैठे,कुछ देर बाद शुमना भी आ गई ।तीनो ने पूजा समाप्त की और गांव में अखाड़े की दीवाली देखने की तैयारी में लग गए ।कमली तैयार हो चुकी तो वह बाबा के कमरे मे बाबा को बुलाने गई ।तब उसने देखा बाबा बोतल से गिलास में भट कर दारू के घूंट लगा रहे थे ," चलो बाबा अखाड़े में ,सब लोग आ गए होंगे,ढोल की आवाज सुनाई पड़ रही है "।
"हां हां चलते है अभी ,बस थोड़ी देर में "सूरत बोला
सूरत ने गिलास में से आखिरी घूंट भरा और उठ खड़ा हुआ ।
सवांली गांव में आज धुम मची थी । दो सौ परीवारों का ये गांव अपनी सांस्कृतिक त्योहारों को ,अपनी पौराणिक धरोहर को भली भांति जीवित रखने के लिए मशहूर था ।
गांव की दीवाली सब लोग अपने पटाखे ले कर अखाड़े में पहुंचे हुए है ।एक जगह पर आग का कुंड बना है ।जिसमे आग जल रही है "ढोल और नगारा बजने लगे है "लोग अपने भैलु (पहाड़ में भैलु का मतलब होता है कुछ लकड़ियों को छोटा गठर बना कर फिर उसे सांकल से बंधा जाता है और आग से जला कर फिर घूमाया जाता है ) जलाने लगे थे ,और फिर एक साथ दस पंद्रह भैलु घूमते हुए नजर आते है ।अंधेरे में दूर से बड़ा मन मोहक दृश्य लगता है ।पटाखों की आवाज भी साथ साथ आती है,लग भाग एक घंटे तक ये सब चलता है । फिर सुरु होता है गीतों का और पारंपरिक नृत्यों का दौर ,झुमैलो ,चाँचरी नृत्य ,गांव की स्त्रियां एक दूसरे के कंधे में हाथ डाल कर गीत गाती हुई गोल गोल घूमती है,ओर एक ताल पर पैरों को गति देती है । इधर दूसरी तरफ पुरुषों की टोली भी पारंपरिक गीत गाती है ,बड़ा मनमोहक दृश्य होता है । लग भाग दो घंटे तक ये सब चलता है । कमली भी अपनी सहेलियों से मिल कर बहुत प्रसन्न होती है ।
और फिर लग भाग मध्य रात्रि तक लोग वापस घर आते हैं ।
शेष अगले भाग में......। स्पर्श भाग 2

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