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Wednesday, September 6, 2023

धरती पुत्र भाग 5 (हकीकत)

 


दिवान सिंह और प्रताप दोनो एक साथ बैठे थे , बाहर हल्की बारिश हो रही थी ,
"चाचा जी आपको पता है , हमारी दोस्ती और मेहनत को देख कर गांव वालों में कानाफूसी ही रही है " दीवान सिंह बोला
"जानता हूँ अभी तो सुरुआत है  , तुम देखते जाओ दिवान सिंह  मैंने तुम से इस जमीन पर किताबों के चरित्र उतारने की बात कही थी , वो काम मै करके छोडूंगा , दिवान सिंह देखो वही मैं हूँ वही गाँव वाले हैं वही गाँव की धरती माँ है फिर कमी कहां है ? कमी सिर्फ लगन की है, कमी आस्था की है ,कड़ी मेहनत की है  और हौसले की है ,बस लोगों में इसी हौसले को पैदा करना है ,गांव का आदमी सिर्फ़ जमीन के प्रति विमुख है  " प्रताप ने कहा ,ा , दीवान सिंह प्रताप की ये बात सुन कर गद गद हो उठा ,और भावुक  हो गया , सचमुच क्या इस धरती पर  प्रताप जैसे लोग हैं , इतने बड़े जहां में दिवान सिंह ने ऐसी हिम्मत और ऐसे हौसले रखने वाला कोई नही देखा था आज तक ,   दिवान सिंह ने महसूस किया लोग भी उनकी देखा देखी मेहनत करने लगे हैं , और उनकी बातों का अनुसरण करने लगे हैं , इस बार प्रताप और उसके खेतों में समय से खाद और कड़ी मेहनत से अच्छी फसल उगी है ,पहले से कहीं अच्छी । क्यारियों में भी साब्जियां खूब हुई ,ये सब समय से देखभाल और पानी की तराई करने से संभव हुआ था ।
आज गांव में प्रधान जी ने एक मीटिंग बिठाई है , दोनो भी वहाँ पहुंच गए ,मीटिंग बुलाने का कारण एक ही था "विकास कार्यों और पलायन पर चर्चा "मीटिंग में पटवारी समेत ग्राम विकासअधिकारी,प्रमुख और वार्ड के सदस्य औऱ कुछ गांव के लोग बैठे थे , वही प्रताप और दीवान सिंह की तरफ भी काफी लोग बैठे थे । स्पष्ट था कि जो जिसकी  तरफ बैठे थे वो दिल से उनके समर्थक है ।खैर बात ग्राम प्रधान ने आरम्भ की ।
" आदरणीय विकाश अधिकारी जी ,पटवारी जी , और सभी वार्ड मेंबर और ग्राम के सभी सदस्य गण , हम लोग आज यहां पर ग्राम के विकाश पर चर्चा करेंगे , और साथ ही पलायन जो कि आज पर्वतीय क्षेत्र में आम बात हो गई है के विषय मे भी चर्चा करेंगे "  "शुरुआत में में बता दूं कि एक वृक्ष लगाने का   नया अभियान सरकार चलना चाहती है ,हर गांव में फ्री वृक्ष बांटे जाएंगे , और गांव के चारों तरफ लगाए जाएंगे "। " इसके अलावा आप लोग जानते है सरकार की तरफ से कई योजनाएं भी चल रही है जैसे आवास योजना , प्राकृतिक आपदा योजना  आदि , अभी में ग्राम विकास अधिकारी जी से निवेदन करूँगा की दो शब्द कहे " ।
तभी अधिकारी जी उठे और अपनी बात रखने लगे ,
"आदरणीय ग्राम प्रधान जी एवं अन्य उपस्थित गण , जैसा कि प्रधान जी ने बताया कि कितनी तरह की योजनाएं सरकार की तरफ से चल रही है , आप उनका बखूबी लाभ उठा सकते है , हम हर समय आपके साथ हैं , हम लोगों को यहीं पर रह कर मेहनत करनी चाहिए , नाकि पलायन की बात सोचनी चाहिए " । "आज पलायन बहुत बड़ी समस्या बन गई है , इतना सब कुछ होते हुए भी लोग पलायन को क्यों मजबूर हैं ।आप लोगों में से कोई कुछ कहना चाहता है तो उठकर कह सकता है "।
कोई नही उठा , तभी सबकी नजरें प्रताप की ओर उठ गई , प्रताप समझ गया लोग उससे उम्मीद लगा रहे थे । वह उठा और बोला , " आदणीय प्रधान जी ग्राम विकाश अधिकारी ,पटवारी जी एवं अन्य सभी वार्ड मेंबर , जैसा कि आपने  अभी सारी बातें  सुनी , विकास अधिकारी जी की बाते भी आपने सुनी , सब  पलायन की बात करते हैं , औऱ हर कोई पलायन की समस्या को बड़े आराम से लोगों के सिर पर थोप देते है , और खुद साफ बच कर निकल जाते हैं " , " मैं आपसे ये पूछना चाहता हूं कि सरकार की. क्या जिम्मेदारी है , बस योजनाओं को बनाना और कागजों पर गांव गाँवों तक पहुंचना ? वह  योजना  कितने लोगों तक पहुंची , कितने लोग लाभन्वित हुए , और जो नही हो पाए उनके क्या कारण रहे , इसकी कोई जवाब देहि आप लोगों के पास है , श्री मान विकास अधिकारी जी आप चाहते तो ये पलायन रुक सकता था , आपसे मतलब आप जैसे अधिकारी गण , मगर आपकी कार्य के प्रति निष्क्रियता , और उदासीनता के चलते सब कुछ स्वाहा हो गया , आप लोगों ने अपना अधिकार तो समझ लिया मगर कर्तव्य के प्रति बड़ी बेरुखी अपनाई , आप सब लोग असमर्थ नही थे ,  आपलोग अकर्मण्य थे "। तभी बड़ी तेजी से पटवारी जी खड़े हुए, और अधिकारी का बचाव करते उनके पक्ष में कहने लगे , " श्रीमान प्रताप सिंह जी ,ये आप कैसी बात कर रहे हैं , भला हम  लोग उदासीन कैसे हो गए , आप बेवजह सारा दोष हम लोगों पर मढ़ रहे हैं "  ," तब प्रताप बोला पटवारी जी मैं यहां पर आपको दोषी करार देने नही आया हूँ, सिर्फ आप लोगों की गलतियों का अहसास कराने आया हूँ " , " जानता मैं सब कुछ हूँ मुझसे कुछ छुपा नही है , आपकी कार्य करने की शैली का मुझे पता है,आपने किस तरह और किसके किसके ऋण स्वीकृत किये हैं । आपके पास प्राकृतिक आपदा ऋण ,और  आवास योजना ऋण, और भी अन्य तरह के ऋण अभी भी लंबित हैं औऱ कितने विचाराधीन है " , " आप अपनी गैर जिम्मेदाराना हरकतों  से अपने आपको कभी माफ नही कर सकेंगे, अभी अगर सभी तरह की योजनाओं की फाइलों का निरीक्षण किया जाय तो सही तरीके से की गई स्वीकृतियां केवल दस प्रतिशत ही होंगी " , तभी एक युवक बोल उठा ,  " "प्रताप सिंह , अरे भाई ऐसी बात नही है , सरकारी काम मे दिक्कत तो आती ही है " तब प्रताप बोला ,  " देखा अधिकारी जी , हो गया एक दूसरे का बचाव सुरु , यहां पर और भी बहुत लोग हैं जिन्होंने गलत रास्ता अपनाया है , कोई आवाज कैसे उठाये सब भ्रस्टाचार में लिप्त हैं ।और एक दूसरे का बचाव करते हैं " ,  " मानव को अन्न बांटने वाली इस धरती माँ को तुम सब लोगों ने असहाय बना दिया , जिस देव भूमि पर लोग आने को तरसते हैं , उसी धरती माँ के लाडले पलायन कर रहे है , उनकी मायूसी के जिम्मेवार आप लोग हैं ,  मेरी उत्तराखंड की इस पावन धरती को आप सब लोगों ने भ्रष्ट किया है इस धरती मां को उनके सपूतों से दूर किया है , आपार सम्पदा के होते हुए भी यहां के सीधे सच्चे लोग दर डर भटकने को मजबूर हैं " । " तुम लोगों ने धरती मां को उनके बच्चों से विमुख करने का दोषपूर्ण कार्य किया है "। प्रताप थोडा सा भावुक को गया ,  " मगर मैं ऐसा नही होने दूंगा, सबको उनकी औकात बता कर ही दम लूंगा , और इस धरती माँ की गोद मे  हमारे लिए कितना कुछ है , ये सबको बता दूंगा । बहुत से लोग तो समझ चुके हैं और  और लोग भी जल्दी ही समझ जाएंगे , पलायन की एक हकीकत यह भी है " प्रताप की इस बात पर सबने तालियां बजाई ।और प्रताप भाई जिंदाबाद, की आवाज से  माहौल गूंज उठा । तभी दीवान सिंह उठा और बोला " भाइयों इस धरती माँ के आंचल में इतनी संपदा है कि हम बटोर नही सकते , पिछले कुछ दिनों में आपने हमे देख लिया होगा , हमारा थोड़ा सा परिश्रम  कितना रंग लाया है , हमें जरूरत है तो बस सच्ची लगन की ,धरती माँ के प्रति आस्था की दृढ़ संकल्प की , अगर हम सभी ऐसा प्रयत्न करें और परिश्रम करें तो ये धरती एक मिशाल बन जाएगी , और पलायन नही होगा " । फिर से प्रताप के समर्थन में तालियाँ बज उठी । ग्राम प्रधान प्रमुख और पटवारी समेत अधिकारी भी अचंभित रह गए सब के चेहरे उतर गए । उसके पश्चात सब प्रताप के संगरक्षण में कार्य करने लगे । और जीतोड़ मेहनत का बीड़ा उठाया । फलस्वरूप नई फसल में आश्चर्यजनक परिवर्तन आया , फसल में इतनी वृद्धि देख कर गांव के लोगों में नया उत्साह जागा ,  दूसरे गांव के लोग भी आकर प्रताप से सलाह मांगने  लगे ,लोगों में आये इस परिवर्तन को देख विकाश अधिकारी ,पटवारी प्रमुख और प्रधान  भी इस मुहिम में दिलसे शामिल हो गए और उन्होंने विकाश के लिए  यथा संभव प्रयत्न किया । प्रताप  एक प्रतीक बन गया , चर्चा गांव से शहर तक फैली तो प्रताप के परिवार को भी पता चला ।और गांव आकर उसके बेटों ने  अपने पिता  के आदर्शों का सम्मान किया और पत्नी ने भी अपने विमुख व्यवहार के लिए क्षमा मांगी ।अब गांव में खुशहाली का दौर अचूका था । बाद के कुछ दिनों में प्रताप को विकास अधिकारी  और अन्य अधिकारियों के अनुरोध पर जिला स्तर पर सम्मानित एवं पुरष्कृत भी किया गया । एक शाम प्रताप अपने  आंगन में चारपाई पर लेट आसमान की तरफ देख रहा था उसे एक झपकी आई तभी उसने महसूस किया कोई उसके सिर पर उंगलियों से बालों को सहला रहा है , उसके कानों में आवाज सुनाई पड़ी , बेटा सो गए क्या ? मैं हूँ तुम्हारी माँ धरती माँ  , बेटा आज मैं बहुत खुश हूं ,तुम्हारे काम से तुमने वो कर दिखया है  जो कोई कर ना सका , देखो चारों तरफ हरियाली ये बढ़ते हुए पेड़ , और ये लहलहाती ठंडी हवाएं , ये तुम्हारी मेहनत का फल है , तुम्हारे कड़े संकल्प का परिणाम , देख तो जरा सूने से पड़े इस गांव में कितनी चहल पहल हो गई है कितनी खुशहाली आ गईं है ,हर आँखोँ में नए सपने तैरने लगे हैँ ,हर चेहरे पर उम्मीद भरी मुश्कान दिख रही है ,आज तुम्हारी वजह से मेरे बेटों ने मेरी तरफ रुख कर लिया है ।अब मैं अपने बेटों से दूर नही हूँ । तू मेरा पुत्र कहलाने का सच्चा अधिकारी है । तू असली धरती पुत्र है , हाँ धरती पुत्र है ।
प्रताप ने धीरे से आंखें खोली , धरती माँ का आश्रीवाद पाकर वह बहुत प्रशन्नता से भर उठा , उसने देखा उसके लगाए पेड़ अंगड़ाइयां लेकर बड़े हो रहे थे ,अगल बगल की क्यारियां फल फूल रही थी ,  गौरैया और अन्य पक्षी आंगन में दाना चुगने में व्यस्त है । उसे लगा जैसे फिर वही बचपन जैसा समय आ गया है  ।
उसका स्वप्न पूरा हो चुका था, अब उसे लगने लगा था कि जिस काम के लिए उसका जन्म हुआ था , वह सम्पन्न होने को है , अपने जीवन की सार्थकता  से वह अति प्रसन्न था  ।
                                         भगवान सिंह रावत
                                                           दिल्ली

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