आम आदमी
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क्या चीज हो रहा आम आदमी,
नाचीज हो रहा आम आदमी |
संघर्षों का बोझ पीठ पर,
ता ऊम्र धो रहा आम आदमी |
थका थका सा हारा हारा ,
जाने कितनी दूर किनारा |
सुबिधाओं की बाट जोहते ,
बीत गया ये जीवन सारा |
हाथ लगी जो नाउम्मीदी ,
खुद ही रो रहा आम आदमी | क्या चीज हो.........|
सुबह शाम बस काम ही काम
बिना काम के कहाँ है दाम |
हाड़तोड़ मेहनत ही है बस ,
नहीं चैन और ना आराम |
थकी जहां ये बोझिल पलकें ,
वहीँ सो रहा आम आदमी | क्या चीज हो.........|
कहीं दीखता नहीं सुधार ,
मंहगाई की सीधी मार |
वायु यान के यूग मैं भी,
चींटी सी चाल चले सरकार|
क्या पाया है हमने अबतक .
क्या खो रहा है आम आदमी | क्या चीज हो.........|
कभी तो बदले वक्त की नियत ,
कोई तो हो ऐसी सख्सियत |
नकली चेहरों के शहर में ,
कोई तो होगी असली सूरत |
सदियों से बंजर धरती पर ,
स्वप्न बो रहा आम आदमी |
क्या चीज हो रहा आम आदमी,
नाचीज हो रहा आम आदमी |
संघर्षों का बोझ पीठ पर,
ता ऊम्र धो रहा आम आदमी |

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