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Sunday, September 9, 2012

खामोश


बेजुबान

खामोश  हूँ मगर बेजुबान नहीं हूँ ,
निर्जीव सा रखा हुआ कोई सामान नहीं हूँ |
सब जानता समझता हूँ तुम्हें ,
तुम्हारी हरकतों से अंजान नहीं हूँ 
चेहरे बदल बदल कर जख्म दिए हैं तुमने
ये बात और है लहू लुहान नहीं हूँ |
अपने जैसा नहीं बना पाओगे मुझे,
साधू हूँ कोई शैतान  नहीं हूँ |
क़त्ल करते हो और मुझमे दफनाते हो,   
तुम्हारा राज दार हूँ शमशान नहीं हूँ |
मुझ से नज़र ना चुराओ चोरों की तरह ,
सब कुछ देखता हूँ नादान नहीं हूँ |
क्यूं भागते हो मुझ से दूर दूर,
तुम्हारे बीच में रहता हूँ भगवान् नहीं हूँ |
तांक झांक करते हो कभी खुद मैं भी झांको ,
अंतरात्मा हूँ तुम्हारी मैं कोई इंसान नहीं हूँ ।
  
          ((भगवान सिंह रावत)
    

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