फूलों जैसा प्यार तुम्हारा
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फूलों जैसा प्यार तुम्हारा ,खुसबू सा इजहार तुम्हारा ,
पुरवा सी मुस्कान तुम्हारी ,ऋतुओं सा व्यवहार तुम्हारा |
साथ तुम्हारा जब जब पाया ,कंचन की सी थी वो काया ,
रज़त सरीखी हंसी तुम्हारी ,गन्धर्वों सा स्वर लहराया ,
माणिक जैसा उजला उजला ,बाँहों का ये हार तुम्हारा |
फूलों जैसा प्यार तुम्हारा ............ |
होते हो पर नज़र न आते ,जाने कहाँ कहाँ छुप जाते ,
कौन जहाँ से आते हो तुम ,पता ठिकाना नहीं बताते ,
लुका छिपी का खेल खिलाता,कैसा है संसार तुम्हारा |
फूलों जैसा प्यार तुम्हारा ............ |
कभी ख्वाब और कभी ख़याल ,बीते दिन महीने साल
अल्पक देखे राह तुहारी उम्र पूछती रही सवाल ,
कब जोड़ेगा टूटी सरगम ,मन वीणा का तार तुम्हारा |
फूलों जैसा प्यार तुम्हारा ,खुसबू सा इजहार तुम्हारा ,
पुरवा सी मुस्कान तुम्हारी ,ऋतुओं सा व्यवहार तुम्हारा |
भगवान सिंह रावत

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