कमला ने दीवार पर टंगी पुरानी घड़ी पर नजर डाली तो वह झट से उठ बैठी ,"ओह.... सात बजने वाले है ,साढ़े सात बजे मुझे कोठी पर पहुंचना है ,देर हो गई "वह अपने मे ही बुदबुदाई ।और जल्दी से उठ कर मुह हाथ धोए , बगल में दस साल का उसका लड़का चंदू सो रहा था ।उसने चंदू को उठाया और कहा "चंदू उठ जा देर हो गई है चल जल्दी मुह हाथ धो ,में चाय बनाती हूं तब तक "और उसने केतली में पानी डाल चूल्हे पर चढ़ाया । रात की बची रोटी और कुछ शब्जी चंदू को परोसती वह बोली ,"चंदू ले खा पीकर स्कूल चले जाना ,और घर मे ही रहना ,आवारागर्दी मत करना ,दो बजे आकर में खाना बना दूंगी ,अभी में जा रही हूँ "और तेज कदमों से वह चल पड़ी , आज फिर देर हो गई ,शालिनी मेम साब डाँटेगी ,बिट्टू बाबा के लिए नाश्ता बनाना है, और खाना बनाना है ,और बाबू जी को खिला कर तब दूसरी जगह झाड़ू पोछा । उफ ... बड़ा झंझट है ,पर क्या कर सकते हैं ,जो पैसे देगा काम भी लेगा , साहब तो घर मे कम ही दिखते है ,आये दिन बाहर ही रहते है ,घर मे केवल तीन प्राणी है ,शालिनी मेंम साब उनका लड़का बिट्टू बाबा , जो कि पंद्रह साल का था उसके चंदू की उम्र का मगर क्या मोटापा था ,लगता था जैसे पच्चीस साल का हो , और शालिनी मेंम साब के ससुर बड़े बाबू जी ,बाबू जी अक्शर बीमार ही रहते हैं , उनकी बड़ी देखभाल करनी पड़ती है , उधर शालिनी मेमसाब बहुत सख्त मिजाज की थी ,बाबू जी को नास्ते में, खाने में क्या देना है,बिटटू बाबा को क्या खाना है ,ये सब वही देखती थी ,कमली गेट खोलती अंदर पंहुंचीं तो शालिनी बोली "आज फिर देर कर दी कमली टाइम से आया करो " जल्दी से साड़ी का पल्लू कमर में खोंस कमली अपने काम मे जुट गई । सबका नास्ता तैयार कर टेबल पर लगा कमली एक तरफ बैठ गई ,नास्ता कर बिट्टू बाबा स्कूल चले गए बाबू जी अपने कमरे में चले गए , फिर सारे बर्तन समेत कर सिंक में लेजाकर उन्हें धोने के बाद कमली बोली " मेमसाब मैं चलूं "
"हाँ जाओ ठीक टाइम से आया करो "। "जी मेमसाब" और कमली वहाँ से चल पड़ी दूसरी जगह झाड़ू पोछा कर कमली को डेड बज गए ।और घर आते आते दो बजे गए । वह थक चुकी थी ,अपनी रोज की इस दिनचर्या से ,चंदू और अपने लिए खाना बना कर वह चारपाई पर पसर गई ।
काश चंदू के बाबा साथ होते तो ये सब अकेले उसे ना झेलना पड़ता । उसे याद आया तीन साल पहले की तो बात है ,अचानक चंदू के बाबा बीमार पड़ गए,
बीमार ऐसे कि खाट जब पकड़ी तो बस चार कंधों पर ही उठे । क्या वक़्त था । खैराती अस्पताल के चक्कर काटते काटते पैर घिस गए मगर चंदू के बाबा की हालत नही सुधरी ,आखिर वही हुआ ,चंदू के बाबा उन दोनों को छोड़ कर चल बसे ।बस फिर समस्या वही घर कैसे चले,कमली कोई पढ़ी लिखी तो थी नही ,सो दो घरों में काम पकड़ लिया ,और गृहस्थी की गाड़ी खींचने में लग गई ।तभी उसे टन टन की आवाज ने चौंक ढिया ।उसकी नींद उचट गई उसने देखा दीवार पर लगी घड़ी तीन बजने की घोषणा कर रही थी ,हर घंटे पर वह बज उठती थी ।वह उठ बैठी , ।रंजना मेम साब की दी हुई पुरानी घड़ी थी जो दीवार पर टंगी वक़्त हिसाब किताब रखती थी,जब चंदू आया तो दोनों ने मिल कर खाना खाया ।दो तीन घंटे आराम करके फिर शाम को भी शालिनी मेम साब के यहां बर्तन करने जाना था । बस कमली की यही दिनचर्या थी ,किसी तरह गुजारा चल रहा था ,बड़े और ऊंचे सपने देखना अब उसके नसीब में नही था ऐसा वह सोचती थी ।
अगले दिन सुबह शालिनी मेमसाब के घर पर उसने नास्ता तैयार कर मेज पर लगाया ,और खुद दूर एक स्टूल पर बैठ कर चाय पीने लगी शालिनी ने उसे कुछ बिस्किट खाने को दिए ।बाबू जी और बिट्टू बाबा आकर बैठ गए ,शालिनी भी नास्ता करने बैठ गई । नास्ते में आमलेट ब्रेड और मख्खन और हलवा रखा था ।कमली सोच रही थी काश वह भी अपने परिवार के साथ ऐसे ही नास्ता करने बैठती,बिट्टू बाबा की तरह चंदू भी बैठा होता ,आमलेट और हलवे की सुगंध उसके नथुनों तक पहुंच रही थी,जमाना हो गया था ऐसे व्यंजन को घर पर बनाये ,और खाये हुए , रोटी शब्जी और दाल चावल मिल जाये इतना ही बहुत है ।
बिट्टू बाबा ने ब्रेड पर छुरी से मख्खन लगाया और खाने को हुए तभी शालिनी गुस्से में बोली " बिट्टू....। ये क्या कर रहे हो" , "क्या मम्मा " वह बोला , आपको पता है ना आपको फैट वाली चीज नही खानी , " मम्मा इतने से क्या होता है" वह बोला और मुह में ले जाकर ब्रैड खाने लगा ,नही..नहीं......।वह गुस्से से बोली और उठकर उनके मुह से आधा ब्रेड खींच लिया ।" अपना वजन देखा है पता है ,डॉक्टर को भी दिखाने में पैसा लगता है वह बोली तबियत खराब होगी वो अलग" ,ये कह कर उसने उस बचे टुकड़े को कूड़े दान में डाल दिया । बिट्टू का चेहरा रुआंसा सा हो गया वह कुछ बोल नही पाया ,और चुप चाप सुखी ब्रेड चबाने लगा ये देख कर कमली की आंखों में आंसू आ गए ।उसे लगा उसके बेटे चंदू के मुह से किसी ने ब्रेड छीन ली हो ,और उसका चंदू रोने लगा हो , बिट्टु बाबा के चेहरे की जगह उसे अपने चिंटू का चेहरा दिख रहा था मायूस सा ,कितना बड़ा पाप है किसी के मुह से आधा खाना छीनना ।
और वह भावावेश में रो पड़ी उसके मुह से निकला "नही मेम साब नही........। मत छीनो , मुह से निवाला छीनना पाप होता है "। सब एक दम स्तब्ध रह गए । कुछ छण तक मौन छाया रहा ।
"तुम्हे क्या हुआ कमली" शालिनी बोली ",क.. क... कुछ नहीं बस ऐसे ही" ,कमली जैसे तंद्रा से जागी ।और सामान्य होने की कोशिश में लग गई ।
कमली ने जल्दी जल्दी काम निपटाया और वापस घर आ गई ।अपनी इस भावुकता पर कमली हैरान थी । और शर्मिंदगी महसूस कर रही थी ।उसने फटा फट खाना बनाया ,चंदू भी स्कूल से आ गया ।दोनों खाना खाने लगे , चंदू की तरफ देखती कमली बोली ," चंदू बेटा खाना अच्छा बना है ना' ?
"हाँ मां बहुत अच्छा "।
कमली ने उसके गाल पर चूम लिया , और प्यार से सर पर हाथ फिराया ,"खा खा शाबाश' ,चंदू मां के इस अप्रत्याशित व्यवहार से आश्चर्य में आ गया ।फिर खाना खा कर झट बाहर खेलने दौड़ गया ।कमली उसे देखती रही चंदू की वह क्या बताए कि वह उसे लेकर कैसे कैसे सपने देखती है ,वह सोच रही थी अपनी अपनी किस्मत है । कोई होते हुए भी नही खा सकता किसी को मिलता ही नही है । इस लिए नही खा सकता ।उसके मष्तिस्क में ध्वन्द चल रहा था , और कुछ देर बाद उसे नींद आ गई ।
भगवान सिंह रावत (स्वरचित)

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