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Tuesday, August 8, 2017

चल दूर कहीं चलते हैं |

चल दूर कहीं चलते हैं  
जहाँ रात नहीं होती है 
दिन कभी नहीं ढलते हैं  | 
जहाँ अन्न का कोई तोल  नहीं 
रोटी का कोई मोल नहीं 
दिलों में सरहद पैदा करदे 
ऐसा कोई भूगोल नहीं 
नफरत का सैलाब  नहीं 
प्यार के दिए जलते हैं  | चल दूर कहीं। ..... | 
जहाँ दुविधा में  इंसान नहीं  
बिका हुआ ईमान नहीं 
साधु के चोले  में कोई 
छिपा हुआ शैतान  नहीं 
वक्त भले ही बदले लेकिन 
चेहरे नहीं बदलते हैं   चल दूर कहीं। ..... | 
सुविद्या से लाचार  नहीं 
मन से कोई बीमार नहीं 
उजले स्वेत वस्त्रों के पीछे 
कोई काली सरकार नहीं 
बिना गबन घोटालों के जहाँ 
रोज अख़बार निकलते हैं   चल दूर कहीं। ..... | 
जहाँ कोई कहीं गुरूर नहीं 
धर्म दया से दूर नहीं 
मद मैं आकर प्रतिभाएं 
वैभव में कहीं चूर नहीं 
करुणा से संताप मिटाकर 
हर्ष के अश्रु निकलते हैं  | 
चल दूर कहीं चलते हैं 
जहाँ रात नहीं होती है 

 दिन कभी नहीं ढलते हैं 

चल दूर कहीं चलते हैं | 
                                भगवान सिंह रावत  (सर्वाधिकार सुरक्षित )


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