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Sunday, September 30, 2012

जिंदगी


          जिंदगी  (2)
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कुछ इस तरह के रंग दिखाती है जिंदगी ,
हंसाती है कभी रुलाती है जिंदगी |
कुछ इस तरह........|
तारीख कहाँ होती है दुनिया मैं उम्र की ,
क्यूँ बड़े बड़े सपने सजाती है जिंदगी |
कुछ इस तरह........|
शुरुआत  से आखिर तक सफ़र ही सफ़र है ,
चैन कहाँ पल भर  पाती है जिंदगी |
कुछ इस तरह........|
नाव है टूटी हुई पतवार क्या करे ,
क्यूँ जुल्म खिव्हये पे ढाती है जिंदगी |
कुछ इस तरह........|
अपने से किये सितम का कुछ गिला नहीं ,
दुनिया से मिले  जख्म दिखाती जिंदगी |
कुछ इस तरह........|
गुस्सा ,गुरूर,नफरत मौजूद सब यहाँ ,
दौलत के दायरे मैं जब आती है जिंदगी |
कुछ इस तरह........|
काँटों से  भरी  राह हो मुश्किल हो सैकड़ों,
हर चीज को तब दिल से लगाती जिंदगी  |
कुछ इस तरह के रंग दिखाती है जिंदगी ,
हंसाती है कभी रुलाती है जिंदगी |
                     (भगवान सिंह रावत )

Wednesday, September 26, 2012

फूलों जैसा प्यार तुम्हारा


    फूलों जैसा प्यार तुम्हारा
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फूलों जैसा प्यार तुम्हारा ,खुसबू सा इजहार तुम्हारा ,
पुरवा सी मुस्कान तुम्हारी ,ऋतुओं सा  व्यवहार तुम्हारा |
साथ तुम्हारा जब जब पाया ,कंचन की सी थी वो काया ,
रज़त सरीखी हंसी तुम्हारी ,गन्धर्वों सा स्वर लहराया  ,
माणिक जैसा  उजला उजला ,बाँहों का ये हार तुम्हारा |
फूलों जैसा प्यार तुम्हारा ............ |
होते हो पर नज़र न आते ,जाने कहाँ कहाँ छुप जाते ,
कौन जहाँ से आते हो तुम ,पता ठिकाना नहीं बताते ,
लुका  छिपी का खेल खिलाता,कैसा है संसार तुम्हारा |
फूलों जैसा प्यार तुम्हारा ............ |
कभी ख्वाब  और कभी ख़याल ,बीते दिन महीने साल
अल्पक देखे राह तुहारी उम्र पूछती रही सवाल ,
कब जोड़ेगा टूटी सरगम ,मन वीणा का तार तुम्हारा |
फूलों जैसा प्यार तुम्हारा ,खुसबू सा इजहार तुम्हारा ,
पुरवा सी मुस्कान तुम्हारी ,ऋतुओं सा  व्यवहार तुम्हारा |


                     भगवान सिंह रावत 

Sunday, September 9, 2012

खामोश


बेजुबान

खामोश  हूँ मगर बेजुबान नहीं हूँ ,
निर्जीव सा रखा हुआ कोई सामान नहीं हूँ |
सब जानता समझता हूँ तुम्हें ,
तुम्हारी हरकतों से अंजान नहीं हूँ 
चेहरे बदल बदल कर जख्म दिए हैं तुमने
ये बात और है लहू लुहान नहीं हूँ |
अपने जैसा नहीं बना पाओगे मुझे,
साधू हूँ कोई शैतान  नहीं हूँ |
क़त्ल करते हो और मुझमे दफनाते हो,   
तुम्हारा राज दार हूँ शमशान नहीं हूँ |
मुझ से नज़र ना चुराओ चोरों की तरह ,
सब कुछ देखता हूँ नादान नहीं हूँ |
क्यूं भागते हो मुझ से दूर दूर,
तुम्हारे बीच में रहता हूँ भगवान् नहीं हूँ |
तांक झांक करते हो कभी खुद मैं भी झांको ,
अंतरात्मा हूँ तुम्हारी मैं कोई इंसान नहीं हूँ ।
  
          ((भगवान सिंह रावत)