जिंदगी (2)
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कुछ इस तरह के रंग दिखाती है जिंदगी ,
हंसाती है कभी रुलाती है जिंदगी |
कुछ इस तरह........|
तारीख कहाँ होती है दुनिया मैं उम्र की ,
क्यूँ बड़े बड़े सपने सजाती है जिंदगी |
कुछ इस तरह........|
शुरुआत से आखिर तक सफ़र ही सफ़र है ,
चैन कहाँ पल भर पाती है जिंदगी |
कुछ इस तरह........|
नाव है टूटी हुई पतवार क्या करे ,
क्यूँ जुल्म खिव्हये पे ढाती है जिंदगी |
कुछ इस तरह........|
अपने से किये सितम का कुछ गिला नहीं ,
दुनिया से मिले जख्म दिखाती जिंदगी |
कुछ इस तरह........|
गुस्सा ,गुरूर,नफरत मौजूद सब यहाँ ,
दौलत के दायरे मैं जब आती है जिंदगी |
कुछ इस तरह........|
काँटों से भरी राह हो मुश्किल हो सैकड़ों,
हर चीज को तब दिल से लगाती जिंदगी |
कुछ इस तरह के रंग दिखाती है जिंदगी ,
हंसाती है कभी रुलाती है जिंदगी |
(भगवान सिंह रावत )
