खामोशी
पानी की तरह शीतल है तू
हवाओं सा मदहोश है तू
वर्षों से जिसे ठुकराया गया
ये प्यार मेरे खामोश है तू ।
नदिया के दोनों छोरों सा
चंदा और चकोरों सा
कान्हा और राधा के जैसा
मुरली और ग्वाल के छोरों सा
इस युग में तेरी कद्र नहीं
उस युग का विजय घोष है तू ।
पानी की तरह शीतल है तू
हवाओं सा मदहोश है तू
वर्षों से जिसे ठुकराया गया
ये प्यार मेरे खामोश है तू ।
जेठ की तपती धुप है तू
सावन में मेघ का रूप है तू
बसंती रंग में रंगा रंगा
वसुधा का रूप अनूप है तू
सहज है सम्मानित है
संम्पूर्ण है संतोष है तू ।
पानी की तरह शीतल है तू
हवाओं सा मदहोश है तू
वर्षों से जिसे ठुकराया गया
ये प्यार मेरे खामोश है तू ।
प्रेम तो बस एक राज यहां
गूंजती है आवाज यहां
अभिनय तो अच्छा करते हैं
पर सारे सौदे बाज़ यहां
अहसास है अशक्ति है
आलिंगन है आगोश है तू ।
पानी की तरह शीतल है तू
हवाओं सा मदहोश है तू
वर्षों से जिसे ठुकराया गया
ये प्यार मेरे खामोश है तू ।
(भगवान सिंह रावत) सर्वाधिकार सुरक्षित
