जीवन की राहों पर चलते
जब दुविधा से घिर जाता हूँ
कलम से लिख कर कागज पर
अपने भाव जताता हूँ
मैं तो गीत बनाता हूँ | मैं तो गीत बनाता हूँ |
नीरसता छा जाती है
जब कुंठाएं घिर आती है
नई नई बाधाएँ आकर
अपना पता बताती है
वक्त के हाथों छीन के कुछ पल
अपने लिए बचाता हूँ | मैं तो गीत बनाता हूँ |
कहीं शोक संताप कहीं
छाया पश्चाताप कहीं
कहीं वेदना उमड़ रही है
दुख और दर्द विलाप कहीं
करुण काव्य लिखने से पहले
खुद को बहुत रुलाता हूँ | मैं तो गीत बनाता हूँ |
ये वैमनस्य और ये अलगाव
ताजे हों जब बासी घाव
गर्म मिजाज के मौसम में
मद और क्रोध का हो टकराव
नफरत की भीषण आंधी में
प्रेम के दीप जलाता हूं| मैं तो गीत बनाता हूँ |
जीने का दम भरते लोग
सच से कितना डरते लोग
जीने के लिए दौड़ लगाते
फिर भी कितने मरते लोग
थककर चूर न हो जाऊं
इतनी ही दौड़ लगता हूं | मैं तो गीत बनाता हूँ
प्रेम का जो वरदान मिले
पत्थर के इन्सान मिले
जुड़े दिलों को तोड़ तोड़ दे
ऐसे भी शैतान मिले
काँटों के बीहड़ में जाकर
मैं तो फूल उगाता हूं
मैं तो गीत बनाता हूँ मैं तो गीत बनाता हूँ

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