भ्रष्ट तंत्र
राह से तिमिर हटा
ज्ञान दीप जल पड़े |
भ्रष्ट तंत्र नष्ट हेतु
लक्ष पग निकल पड़े |
ईमान बेच कर बने
प्रासाद ध्वस्त कर चलो |
कठोर कर्म से बने
पथ प्रसस्त कर चलो |
व्याधियां विकार मन से
अब निरस्त कर चलो |
वाहिनी बना बना
असंख्य जन मचल पड़े |
ज्ञान दीप जल पड़े |
भ्रष्ट तंत्र नष्ट हेतु
लक्ष पग निकल पड़े |
ईमान बेच कर बने
प्रासाद ध्वस्त कर चलो |
कठोर कर्म से बने
पथ प्रसस्त कर चलो |
व्याधियां विकार मन से
अब निरस्त कर चलो |
वाहिनी बना बना
असंख्य जन मचल पड़े |
राह से तिमिर हटा
ज्ञान दीप जल पड़े |
समाज से ये राजतंत्र
दूर हो नष्ट हो |
नीतियों का रीतियों का
आईना स्पष्ट हो |
दिखाने और बताने में
अंतर स्पष्ट हो |
तंत्र में बदलाव हो
तैयार हैं हम सब खड़े |
ज्ञान दीप जल पड़े |
समाज से ये राजतंत्र
दूर हो नष्ट हो |
नीतियों का रीतियों का
आईना स्पष्ट हो |
दिखाने और बताने में
अंतर स्पष्ट हो |
तंत्र में बदलाव हो
तैयार हैं हम सब खड़े |
राह से तिमिर हटा
ज्ञान दीप जल पड़े |
बहुत धीर धर चुके
जवाब हमे चाहिए |
मंथर - मंथर नहीं
प्रभाव हमें चाहिए |
विश्वास हो लगन हो
ऐसा भाव हमें चाहिए |
कर्म बोझ न बने
कर्म से जो खुद लड़ें |
ज्ञान दीप जल पड़े |
बहुत धीर धर चुके
जवाब हमे चाहिए |
मंथर - मंथर नहीं
प्रभाव हमें चाहिए |
विश्वास हो लगन हो
ऐसा भाव हमें चाहिए |
कर्म बोझ न बने
कर्म से जो खुद लड़ें |
राह से तिमिर हटा
ज्ञान दीप जल पड़े |
संकुचित समाज को
ऐसा एक यन्त्र दो |
जन जन हो विकसित
कोई ऐसा मंत्र दो |
मिसाल विश्व में बने
ऐसा गणतंत्र दो |
साक्ष्य हो इतिहास भी
ऐसा कुछ बन पड़े |
राह से तिमिर हटा
ज्ञान दीप जल पड़े |
भ्रष्ट तंत्र नष्ट हेतु
लक्ष पग निकल पड़े |
संकुचित समाज को
ऐसा एक यन्त्र दो |
जन जन हो विकसित
कोई ऐसा मंत्र दो |
मिसाल विश्व में बने
ऐसा गणतंत्र दो |
साक्ष्य हो इतिहास भी
ऐसा कुछ बन पड़े |
राह से तिमिर हटा
ज्ञान दीप जल पड़े |
भ्रष्ट तंत्र नष्ट हेतु
लक्ष पग निकल पड़े |
भगवान सिंह रावत (स्वरचित)