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Sunday, February 19, 2017

जाग उत्तराखंडी जाग

जाग उत्तराखंडी जाग ,जाग जाग और जगा
विपत्ति में पहाड़ है  विजय ध्वज उठा उठा
रंगों का उत्सव नहीं ये तो रक्त फाग है
प्रेम की बंसी पे छिड़ा मौत का ये राग है
शत्रु  तेरे सामने है तूणीर औ तरकश उठा
जाग उत्तराखंडी जाग ,जाग जाग और जगा
विपत्ति में पहाड़ है  विजय ध्वज उठा उठा
अमन ओ चैन हो यहां तू भेद भाव तोड़ दे
सबको सब समझ सकें दिलों को दिल से जोड़ दे
नफरतों की आँधियों में प्यार के दीपक जला
जाग उत्तराखंडी जाग ,जाग जाग और जगा
विपत्ति में पहाड़ है  विजय ध्वज उठा उठा
सपूत है धरा का तू धरा के गीत गए जा
जान की बाजी लगे तो हंस के तू लगाए जा
पुजारी हैं हम प्रेम के सब ये बता बता
जाग उत्तराखंडी जाग ,जाग जाग और जगा
विपत्ति में पहाड़ है  विजय ध्वज उठा उठा


       भगवान् सिंह रावत  (सर्वाधिकार सुरक्षित )