प्यार तुम्हारा
तुम साथ मेरे नहीं
तो क्या ,
प्यार तुम्हारा आज
भी है।
फूल सी कोमल बाँहों
का
वो हार तुम्हारा आज
भी है ।
लुकती छिपती धुप छाँव
सी ,
तेरी मेरी प्रीत सही
।
विरह वेदना से तड़पते
,
तेरे मेरे गीत सही
।
दकियानूसी सोच निभाती,
दुनिया की ये रीत सही
।
मेरे दिल की धड़कन पर ,
अधिकार तुम्हारा आज
भी है ।
तुम साथ मेरे नही तो क्या
प्यार तुम्हारा आज भी है।
मुस्किल के उस दौर
में तुमने ,
जीना मुझे सिखाया था
।
दुनिया के हर आडम्बर
का ,
चेहरा मुझे दिखाया
था ।
नफरत की तेज हवाओं
में ,
प्यार का दीप जलाया था ।
उस दीपक से जगमगाता,
संसार तुहारा आज भी
है ।
तुम साथ मेरे नही तो क्या
प्यार तुम्हारा आज भी है।
उम्र ढूंढती तरस रही है
प्यार तुम्हारा पाने
को ।
प्यार का तो अहसास
बहुत है ,
मरने को मिट जाने को
कुछ भी नहीं
इस धरा पर
,
यूँ तो दिल
लगाने को ।
मेरे इस दीवानेपन
को,
इन्तजार तुम्हारा आज भी
है ।
तुम साथ मेरे नही तो क्या
प्यार तुम्हारा आज भी
है ।
फूल सी कोमल बाँहों
का
वो हार तुम्हारा आज
भी है ।
भगवान सिंह रावत दिल्ली
(स्वरचित)
